Tuesday, March 15, 2011

होंठ तो मिलते रहते हैं,पर चिपकते नहीं हैं

फिर वो मिली.
कई साल बाद.
गोद में एक बच्चा लिए.
बदन पहले से कुछ भर गया था,
और सामने के कुछ बाल सफ़ेद हो गए थे.
पेशानी पर झुरियां पद गयी थी.
ज़िन्दगी का तजुर्बा दिखने लगा था.
वक़्त किस्सी को नहीं छोडता...

हमारी नज़रें मिलीं,
आँखों ने आँखों से बातें की,
वो मेरी तरफ देखकर शायद मुस्कुराये भी.
पर होंठ से होंठ नहीं मिले,
वो होंठ जो कभी चिपक जाते थे,
साँसों की गहमा गहमी में....

तुम मेरे लिए एक पुराना ख्वाब बन कर रह गयी हो,
जो कभी कभी याद आता है,
भीड़ में तनहा कर जाता है,
और ये याद दिलाता है के..
आदमी ज़िन्दगी में मोहब्बत सिर्फ एक बार करता है...
प्यार तो कई बार होता है.
होंठ तो मिलते रहते हैं,
पर चिपकते नहीं हैं.

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