प्यार करने के बाद की शांति.
दिमाग एक अजीब शुनिया की स्थिथि मैं.
तुम और मैं गददे पर पड़े, बाहों मैं बाहें डाले,
दो की स्पीड पर चलते हुए पंखे को देख रहे हैं.
तुम्हारा सर मेरे कंधे पर और मेरी उँगलियाँ तुम्हारे बालों को सहला रही हैं.
तुम हलके से चादर को खीचती हुई हमारे ऊपर डाल देती हो.
तुम्हारे cigarette का धुआं तुम्हारे मेरे अन्दर.
love bites जिनका दर्द धीमे धीमे बढ़ रहा है.
मेरी कमर पर तुम्हारे नाखूनों के निशाँ.
और तुम्हारी पेशानी पर एक हल्का सा चुम्बन.
गर फिरदौस, रूहे ज़मीन अस्त, हमीं असतो, हमीं असतो, हमीं असतो*.
लेकिन सब पलछिन, शनभंगुर.
*(if there is paradise on earth, here it is, here it is, here it is)
Monday, February 21, 2011
गीली रात सूखा दिन
इक बरसात सी भीगी रात थी वो जब कार की पिछली सीट पर हमारे लब बार बार मिले थे,
और तुमने मेरे कानो मैं हलके से कहा था,
क्या यहीं प्यार है?
Wipers पूरी जोर से चल रहे थे.
आसमान भी बादलों से घिरा था.
फिर भी कार के शीशे से चिपकी तुम्हारी उँगलियों के बीच से मेरा चाँद मुझे नज़र आ रहा था.
एक वो तुम्हारी लबों सी गीली रात थी, और एक ये मेरे होठों सा सूखा दिन है
और तुमने मेरे कानो मैं हलके से कहा था,
क्या यहीं प्यार है?
Wipers पूरी जोर से चल रहे थे.
आसमान भी बादलों से घिरा था.
फिर भी कार के शीशे से चिपकी तुम्हारी उँगलियों के बीच से मेरा चाँद मुझे नज़र आ रहा था.
एक वो तुम्हारी लबों सी गीली रात थी, और एक ये मेरे होठों सा सूखा दिन है
Friday, February 18, 2011
और पंखे चलने लगे ...
एक वो दिन भी थे,
जब पसीने से लतपत,
मैं और तुम,
हम और वो,
ज़मीन पर पड़े,
एक दुसरे पर फिसलते हुए,
प्यार करते थे.
फिर अन्दर की बिजली बाहर की बिजली बन गयी,
और पंखे चलने लगे
जब पसीने से लतपत,
मैं और तुम,
हम और वो,
ज़मीन पर पड़े,
एक दुसरे पर फिसलते हुए,
प्यार करते थे.
फिर अन्दर की बिजली बाहर की बिजली बन गयी,
और पंखे चलने लगे
Wednesday, February 16, 2011
एक कमीना सा ख्वाब..
कभी पीती हो nescafe तुम प्यार करने के बाद.
और कभी जलाती हो wills navy cut , माचिस से,
और हवा मैं उड़ाती हो गोल गोल चाँद जैसे rings,
ये कहते हुए के अन्दर की आग बुझाने के बाद,
बहार का ये पल भर का धुंआ अच्हा लगता है.
एक कमीना सा ख्वाब..
और कभी जलाती हो wills navy cut , माचिस से,
और हवा मैं उड़ाती हो गोल गोल चाँद जैसे rings,
ये कहते हुए के अन्दर की आग बुझाने के बाद,
बहार का ये पल भर का धुंआ अच्हा लगता है.
एक कमीना सा ख्वाब..
Monday, February 14, 2011
उनको आदत है...
उनको आदत है मुस्कुरा के जिगर जलाने की,
उनको आदत चुम्बन मैं तीखापन मिलाने की,
उनको आदत है दिल देकर अक्सर भूल जाने की,
उनको आदत है दुपट्टा गिराकर लोगों को बरगलाने की,
उनको आदत है एक साथ कई दिलों मैं शम्मा जलाने की.
इक उनका चेहरा पूरे आसमान मैं आधे चाँद सा,
एक मेरी जिद्द उस आधे चाँद को पूरा बनाने की
उनको आदत चुम्बन मैं तीखापन मिलाने की,
उनको आदत है दिल देकर अक्सर भूल जाने की,
उनको आदत है दुपट्टा गिराकर लोगों को बरगलाने की,
उनको आदत है एक साथ कई दिलों मैं शम्मा जलाने की.
इक उनका चेहरा पूरे आसमान मैं आधे चाँद सा,
एक मेरी जिद्द उस आधे चाँद को पूरा बनाने की
Friday, February 11, 2011
चलो साथ मैं नहाते हैं
पिछली दिवाली पर घर नहीं धोया,
कहते हैं वो बड़े प्यार से,
और होली अभी बहुत दूर है.
चलो साथ मैं नहाते हैं
कहते हैं वो बड़े प्यार से,
और होली अभी बहुत दूर है.
चलो साथ मैं नहाते हैं
Thursday, February 10, 2011
मैं तुम से प्यार तो नहीं करती, चाहती ज़रूर हूँ
आज आसमान मैं चाँद नज़र नहीं आता,
नज़र आता है तो सिर्फ तुम्हारा मुस्कुराता हुआ चेहरा,
जिसे पहन कर तुम टेबल के उस तरफ बैठी थी,
और गर्म चाय की चुस्की लगाते हुए याद है तुमने हल्के से कहा था,
जानू,
...मैं तुम से प्यार तो नहीं करती,
चाहती ज़रूर हूँ...
नज़र आता है तो सिर्फ तुम्हारा मुस्कुराता हुआ चेहरा,
जिसे पहन कर तुम टेबल के उस तरफ बैठी थी,
और गर्म चाय की चुस्की लगाते हुए याद है तुमने हल्के से कहा था,
जानू,
...मैं तुम से प्यार तो नहीं करती,
चाहती ज़रूर हूँ...
गददे वाला प्यार
कुछ तेरे जैसा और कुछ मेरे जैसा,
उन सर्दी की रातों मैं ज़मीन पे पड़े गददे वाला प्यार.
आसमान से कुछ दूर और ज़मीन से कुछ नज़दीक,
उन सर्दी की रातों मैं ज़मीन पे पड़े गददे वाला प्यार.
याद है तुमको?
या गर्मियों के आने पर सर्दियों को भूल गयी?
उन सर्दी की रातों मैं ज़मीन पे पड़े गददे वाला प्यार.
आसमान से कुछ दूर और ज़मीन से कुछ नज़दीक,
उन सर्दी की रातों मैं ज़मीन पे पड़े गददे वाला प्यार.
याद है तुमको?
या गर्मियों के आने पर सर्दियों को भूल गयी?
बेशर्म सी रातों मैं अक्सर शर्मीली बातें हो जाती हैं
ट्यूबलाइट की रौशनी मैं जब हम दोनों बेशर्म से पड़े थे,
गददे पर,
प्यार करने के बाद,
तब तुमने मेरे कानो मैं हौले से कहा था,
कभी कभी जब मैं तुम्हे देखती हूँ,
तो मुझे शर्म सी आती है,
बेशर्म सी रातों मैं अक्सर शर्मीली बातें हो जाती हैं.
गददे पर,
प्यार करने के बाद,
तब तुमने मेरे कानो मैं हौले से कहा था,
कभी कभी जब मैं तुम्हे देखती हूँ,
तो मुझे शर्म सी आती है,
बेशर्म सी रातों मैं अक्सर शर्मीली बातें हो जाती हैं.
न तुम मुस्कुराते न ये बात होती
न तुम मुस्कुराते न ये बात होती.
न निगाहों मैं उलझन, न दिल मैं प्यास होती.
क्या प्यार था वो?
शायद प्यार ही होगा.
या मेरे तुम्हारे अन्दर की हवस?
यह तुम्हारा ठोस बदन अजब तौर से मेरे अन्दर बस गया है.
क्या तुम्हारे अन्दर भी समां गया हूँ मैं?
मैं और मेरी तन्हाई अक्सर ये बातें करते हैं
कविता की पहली पंक्ति ये साली ज़िन्दगी फिल्म का dialogue है.
"यह तुम्हारा ठोस बदन अजब तौर से मेरे अन्दर बस गया है" पंक्ति शमशेर बहादुर सिंह की कविता प्रेयसी से ली गयी है.
आखरी पंक्ति "ये कहाँ आ गए हम यूँ ही साथ साथ चलते" गाने से ली गयी, जिसे जावेद अख्तर ने लिखा है
न निगाहों मैं उलझन, न दिल मैं प्यास होती.
क्या प्यार था वो?
शायद प्यार ही होगा.
या मेरे तुम्हारे अन्दर की हवस?
यह तुम्हारा ठोस बदन अजब तौर से मेरे अन्दर बस गया है.
क्या तुम्हारे अन्दर भी समां गया हूँ मैं?
मैं और मेरी तन्हाई अक्सर ये बातें करते हैं
कविता की पहली पंक्ति ये साली ज़िन्दगी फिल्म का dialogue है.
"यह तुम्हारा ठोस बदन अजब तौर से मेरे अन्दर बस गया है" पंक्ति शमशेर बहादुर सिंह की कविता प्रेयसी से ली गयी है.
आखरी पंक्ति "ये कहाँ आ गए हम यूँ ही साथ साथ चलते" गाने से ली गयी, जिसे जावेद अख्तर ने लिखा है
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